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Monday, March 28, 2011

जल और जलन - Dr Nutan Gairola



जंजाल जी का जबसे जाना मुझे जंजल,
जड़ता से तेरी जला जी का जंगल |
जल कर हम तब जलाशय पर गिरे,
जलन ना गयी जलजला आ गया|
जल में खिले जलज सब जले,
जिया जल का जला, जल, जलजल गया|
जलद उठे जलप्रपात बहे,
अश्रुजलविप्लव से जलधि हो गया |


डॉ नूतन गैरोला - २८ -०३-२०११

37 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

ये जल और जलन भी खूब रही

जंजल, -- इसका सही अर्थ नहीं समझ पायी ..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर मुक्त लिखा है आपने!

मनोज कुमार said...

अनुप्रास की छटा देखते बनती है।
अद्भुत प्रयोग।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 29 -03 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

http://charchamanch.blogspot.com/

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...
This comment has been removed by the author.
डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

Dhanyvaad Sangeeta ji... janjal kaa matlab "useless" or "old tattered

=":)"

Er. सत्यम शिवम said...

जल और जलन...जलन के जलन को नहीं
बुझा पाता है जल...खुबसुरत भाव,,,सुंदर रचना।

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

Shastri ji dhanyvaad...

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

manoj ji ..dhanyvaad ...

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

Sangita ji punah shukriya ..meri rachnaa ko manch me jagah dene ke liye... abhaar

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

dhanyvaad Satyam ji..

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बहुत सुंदर बिम्ब ...सुंदर रचना ....

anupama's sukrity ! said...

वाह शब्दों का बहुत खूबसूरत तानाबाना -
बहुत सुंदर रचना -
बधाई.

रश्मि प्रभा... said...

जल कर हम तब जलाशय पर गिरे,
जलन ना गयी जलजला आ गया|
waah nutan ji

सुशील बाकलीवाल said...

सुन्दर रचना.

कुछ-कुछ चाचा ने चाची को चांदी की... टाईप की भी लगी ।

baabusha said...

Very nice use of alliteration ! We often see alliteratin in english literature too.. Loved the poem!

Udan Tashtari said...

अनुप्रास अलंकार का बेहतरीन प्रयोग...

गिरधारी खंकरियाल said...

जलद उठे जलप्रपात बहे,
अश्रुजलविप्लव से जलधि हो गया |
भाव और अलान्करिकता ने चार चाँद लगा दिए है

Navin C. Chaturvedi said...

50 में से 22 शब्द अनुप्रास अलंकार के साथ| एक डिफरेंट टाइप की कविता| बधाई नूतन जी|

SR Bharti said...

जंजाल जी का जबसे जाना मुझे जंजल,
जड़ता से तेरी जला जी का जंगल |
जल कर हम तब जलाशय पर गिरे,
जलन ना गयी जलजला आ गया|
जल में खिले जलज सब जले,
जिया जल का जला, जल, जलजल गया|
जलद उठे जलप्रपात बहे,
अश्रुजलविप्लव से जलधि हो गया |
बहुत सुंदर रचना .........बधाई.

monali said...

Bahut khoob.. ur Hindi vocabulary is superb.. i salute u.. Anupras alankaar ka sundar example :)

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

हर वो भारतवासी जो भी भ्रष्टाचार से दुखी है, वो देश की आन-बान-शान के लिए समाजसेवी श्री अन्ना हजारे की मांग "जन लोकपाल बिल" का समर्थन करने हेतु 022-61550789 पर स्वंय भी मिस्ड कॉल करें और अपने दोस्तों को भी करने के लिए कहे. यह श्री हजारे की लड़ाई नहीं है बल्कि हर उस नागरिक की लड़ाई है जिसने भारत माता की धरती पर जन्म लिया है.पत्रकार-रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा"

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

भ्रष्टाचारियों के मुंह पर तमाचा, जन लोकपाल बिल पास हुआ हमारा.
बजा दिया क्रांति बिगुल, दे दी अपनी आहुति अब देश और श्री अन्ना हजारे की जीत पर योगदान करें आज बगैर ध्रूमपान और शराब का सेवन करें ही हर घर में खुशियाँ मनाये, अपने-अपने घर में तेल,घी का दीपक जलाकर या एक मोमबती जलाकर जीत का जश्न मनाये. जो भी व्यक्ति समर्थ हो वो कम से कम 11 व्यक्तिओं को भोजन करवाएं या कुछ व्यक्ति एकत्रित होकर देश की जीत में योगदान करने के उद्देश्य से प्रसाद रूपी अन्न का वितरण करें.

महत्वपूर्ण सूचना:-अब भी समाजसेवी श्री अन्ना हजारे का समर्थन करने हेतु 022-61550789 पर स्वंय भी मिस्ड कॉल करें और अपने दोस्तों को भी करने के लिए कहे. पत्रकार-रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना हैं ज़ोर कितना बाजू-ऐ-कातिल में है.

sumeet "satya" said...

उलाहना और विरह का मार्मिक चित्रण ...................
अनुप्रास अलंकार का बहुत दिनों बाद अद्भुत प्रयोग देखा
बेहतरीन रचना...........................

ganesh lohani said...

Dr sahiba,
pranam aap bhut achhi poet,writer hen apki kavita dill ko jhkhjhorne wali hen.sath sath matri sewa kar rahi.with regard.

हरीश सिंह said...

बहुत अच्छी पोस्ट, शुभकामना, मैं सभी धर्मो को सम्मान देता हूँ, जिस तरह मुसलमान अपने धर्म के प्रति समर्पित है, उसी तरह हिन्दू भी समर्पित है. यदि समाज में प्रेम,आपसी सौहार्द और समरसता लानी है तो सभी के भावनाओ का सम्मान करना होगा.
यहाँ भी आये. और अपने विचार अवश्य व्यक्त करें ताकि धार्मिक विवादों पर अंकुश लगाया जा सके., हो सके तो फालोवर बनकर हमारा हौसला भी बढ़ाएं.
मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती.

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

देश और समाजहित में देशवासियों/पाठकों/ब्लागरों के नाम संदेश:-
मुझे समझ नहीं आता आखिर क्यों यहाँ ब्लॉग पर एक दूसरे के धर्म को नीचा दिखाना चाहते हैं? पता नहीं कहाँ से इतना वक्त निकाल लेते हैं ऐसे व्यक्ति. एक भी इंसान यह कहीं पर भी या किसी भी धर्म में यह लिखा हुआ दिखा दें कि-हमें आपस में बैर करना चाहिए. फिर क्यों यह धर्मों की लड़ाई में वक्त ख़राब करते हैं. हम में और स्वार्थी राजनीतिकों में क्या फर्क रह जायेगा. धर्मों की लड़ाई लड़ने वालों से सिर्फ एक बात पूछना चाहता हूँ. क्या उन्होंने जितना वक्त यहाँ लड़ाई में खर्च किया है उसका आधा वक्त किसी की निस्वार्थ भावना से मदद करने में खर्च किया है. जैसे-किसी का शिकायती पत्र लिखना, पहचान पत्र का फॉर्म भरना, अंग्रेजी के पत्र का अनुवाद करना आदि . अगर आप में कोई यह कहता है कि-हमारे पास कभी कोई आया ही नहीं. तब आपने आज तक कुछ किया नहीं होगा. इसलिए कोई आता ही नहीं. मेरे पास तो लोगों की लाईन लगी रहती हैं. अगर कोई निस्वार्थ सेवा करना चाहता हैं. तब आप अपना नाम, पता और फ़ोन नं. मुझे ईमेल कर दें और सेवा करने में कौन-सा समय और कितना समय दे सकते हैं लिखकर भेज दें. मैं आपके पास ही के क्षेत्र के लोग मदद प्राप्त करने के लिए भेज देता हूँ. दोस्तों, यह भारत देश हमारा है और साबित कर दो कि-हमने भारत देश की ऐसी धरती पर जन्म लिया है. जहाँ "इंसानियत" से बढ़कर कोई "धर्म" नहीं है और देश की सेवा से बढ़कर कोई बड़ा धर्म नहीं हैं. क्या हम ब्लोगिंग करने के बहाने द्वेष भावना को नहीं बढ़ा रहे हैं? क्यों नहीं आप सभी व्यक्ति अपने किसी ब्लॉगर मित्र की ओर मदद का हाथ बढ़ाते हैं और किसी को आपकी कोई जरूरत (किसी मोड़ पर) तो नहीं है? कहाँ गुम या खोती जा रही हैं हमारी नैतिकता?

मेरे बारे में एक वेबसाइट को अपनी जन्मतिथि, समय और स्थान भेजने के बाद यह कहना है कि- आप अपने पिछले जन्म में एक थिएटर कलाकार थे. आप कला के लिए जुनून अपने विचारों में स्वतंत्र है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास करते हैं. यह पता नहीं कितना सच है, मगर अंजाने में हुई किसी प्रकार की गलती के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ. अब देखते हैं मुझे मेरी गलती का कितने व्यक्ति अहसास करते हैं और मुझे "क्षमादान" देते हैं.
आपका अपना नाचीज़ दोस्त रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा"

Vishal said...

Bohot sunder rachna. Padh kar bohot achha laga!

Dr (Miss) Sharad Singh said...

आन्तरिक भावों के सहज प्रवाहमय सुन्दर रचना....

amrendra "amar" said...

waah bahot sunder likha hai aapne aur utna hi sunder hai aapka blog, badhai

Kavita Prasad said...

जल कर हम तब जलाशय पर गिरे,
जलन ना गयी जलजला आ गया|

achhi panktiyaan hain...

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

श्रीमान जी, मैंने अपने अनुभवों के आधार ""आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें"" हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है. मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग www.rksirfiraa.blogspot.com पर टिप्पणी करने एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

श्रीमान जी, क्या आप हिंदी से प्रेम करते हैं? तब एक बार जरुर आये. मैंने अपने अनुभवों के आधार ""आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें"" हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है. मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग www.rksirfiraa.blogspot.com पर टिप्पणी करने एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.
श्रीमान जी, हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु सुझाव :-आप भी अपने ब्लोगों पर "अपने ब्लॉग में हिंदी में लिखने वाला विजेट" लगाए. मैंने भी कल ही लगाये है. इससे हिंदी प्रेमियों को सुविधा और लाभ होगा.

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 19/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

vandana said...

अश्रुजलविप्लव से जलधि हो गया |....
अनुप्रास देखने योग्य बन पडा है

KASA said...

यह कविता अच्छी है। बहुत अच्छी। नूतन की तमाम कविताएं देखी हैं इसलिए भी कहा जा सकता है-ये बेहतर रचना है। लेकिन जीवन के जलाशय में डूबने से बचने के लिए कविता के अलावा भी बहुत कुछ चाहिए।

KASA said...

यह कविता अच्छी है। बहुत अच्छी। नूतन की तमाम कविताएं देखी हैं इसलिए भी कहा जा सकता है-ये बेहतर रचना है। लेकिन जीवन के जलाशय में डूबने से बचने के लिए कविता के अलावा भी बहुत कुछ चाहिए

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